जेईई-मेन-2021,100 पर्सेन्टाइलर्स में शीर्ष एआईआर के लिए बढ़ेगा कम्पीटिशन

चौथे सेशन के लिए आवेदन 12 जुलाई तक

देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन जो कि इस वर्ष चार बार फरवरी, मार्च, जुलाई एवं अगस्त में आयोजित करवाई जा रही है। इसमें 10 लाख से अधिक यूनीक कैंडिंडेट बैठने की संभावना है। परीक्षा के चौथे सेशन की आवेदन प्रक्रिया 12 जुलाई रात 9 बजे तक जारी रहेगी। हालाकि 9 जुलाई शाम 5 बजे तक आवेदन प्रक्रिया चालू नहीं हुई थी।
 गत वर्ष जेईई-मेन के परिणामों में 24 विद्यार्थी ऐसे थे, जिन्होंने 100 पर्सेन्टाइल एनटीए स्कोर किया था, वहीं इस वर्ष हुई जेईई-मेन फरवरी एवं मार्च में 19 विद्यार्थी ऐसे रहे, जिनका एनटीए स्कोर 100 पर्सेन्टाइल रहा है और अभी जुलाई एवं अगस्त की परीक्षाएं शेष है। तीसरे सेशन की परीक्षा 20 से 25 जुलाई एवं चौथे सेशन की परीक्षा 27 जुलाई से 2 अगस्त के मध्य प्रस्तावित है। यदि एनटीए हर दिन दो शिफ्टों में परीक्षा लेता है, तो तीसरे सेशन की परीक्षा में 12 शिफ्टें होंगी, इसी प्रकार चौथे सेशन में बीई-बीटेक के लिए 12 शिफ्टों में परीक्षा होगी। अतः हर शिफ्ट में कम से कम एक विद्यार्थी का 100 पर्सेन्टाइल लाना तय है। इस तरह से पूरी जेईई-मेन परीक्षा में कम से कम 43 स्टूडेंट्स ऐसे होंगे जिनका 100 पर्सेन्टाइल होगा। यानी गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 100 पर्सेन्टाइल स्कोरर अधिक होने से शीर्ष आल इंडिया रैंक प्राप्त करने के लिए ज्यादा कम्पीटिशन रहेगा। क्योंकि यदि दो विद्यार्थियों का एनटीए स्कोर समान रहता है तो आल इंडिया रैंक देने के लिए उनका सब्जेक्ट्स वाइस एनटीए स्कोर लिया जाता है। जिसमें सर्वप्रथम मैथ्स का एनटीए स्कोर, इसमें टाई लगने पर फिजिक्स का एनटीए स्कोर और इसके बाद भी टाई होने पर कैमेस्ट्री का एनटीए स्कोर देखा जाता है। यदि तीनों विषयों में भी एनटीए स्कोर समान होते हैं तो जिस विद्यार्थी का ऋणात्मक मार्किंग कम होगी, उसे आल इंडिया रैंक में प्राथमिकता दी जाएगी।
वर्ष 2021 के जेईइ-मेन के परिणामों में कुछ विद्यार्थी ऐसे भी हैं, जिनके 100 पर्सेंटाइल के साथ 300 अंक भी हैं। ऐसे में जारी किए गए इनफोर्मेशन बुलेटिन के अनुसार आल इंडिया रैंक जारी करने के लिए बताए गए मापदण्डों पर टाई की स्थिति बनती है तो ऐसे में इन विद्यार्थियों को आल इंडिया रैंक देने के लिए क्या तरीका अपनाया जाएगा, इसका स्पष्टीकरण नहीं है। जबकि 2020 में इन सभी मापदण्डों पर टाई लगने की परिस्थिति में ज्यादा उम्र वाले विद्यार्थी को आल इंडिया रैंक देने में प्राथमिकता दी जाती थी।

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